Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यदेकं चाप्यनेकं च साञ्जनं च निरञ्जनम् ।
यत्सर्वं चाप्यसर्वं च यत्तत्तत्सदसौ स्थितः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इस
प्रकार के विचार से युक्त होकर उन महान् तपस्वी मुनि श्रेष्ठ भगवान वीतहव्य ने अनेक बरसों तक इस
लोक में अपनी स्थिति की