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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verses 30–31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verses 30–31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 30

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे भोग, मैं आप लोगों को प्रणाम करताहू। आप लोगों ने मेरा इस लोक में सौ करोड़ों वर्ष तक उस प्रकार लालन-पालन किया है, जिस प्रकार प्यार करनेवाले पिता आदि ने बालक का लालन-पालन किया हो