Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
सबसे पुण्यतम इस मोक्षपद का भी
जिसने मुझको विस्मरण कराया था, उस अंशरूप विषयसुख को मेँ बार-बार प्रणाम करता हूँ ॥३ १॥ हे
दुःख, तुम्हारे द्वारा सन्तप्त हुए मैने अत्यन्त आदर से आत्मा का अन्वेषण किया है, इसलिए इस मोक्षमार्ग
का तुमने ही मुझको उपदेश दिया। अतः मेरा तुम्हे प्रणाम हो