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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 33

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे दुःख के तत््वभूत सुखद आत्मन्‌, तुम्हारी ही अनुकम्पा से मैंने यह अत्यन्त शीतल पदवी (निरतिशयसुखरूप मोक्ष पदवी) प्राप्त की हे, अतः दुःख नामधारी तुम्हें मेरा प्रणाम हो