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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 39

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अब तृष्णा की प्रार्थना करते हैं। हे मातृरूप तृष्णे, मैं अब जा रहा हूँ। मेरे जाने पर तुम अकेली, शुष्क ओर दीन हो जाओगी, पर दुःख मत करना ॥ ३ ८॥ हे काम भगवान्‌, तुम्हारे ऊपर विजय पाने के लिए मैंने तुम्हारे विरोधी वैराग्य- सेवन आदि दोष किये थे, उन दोषों के लिए मुझे क्षमा-प्रदान कीजिए | अब मैं उत्तम विश्रान्ति की ओर जा रहा हूँ। मेरी मंगल कामना करिए