Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 41
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हिन्दी अर्थ
हे पुण्यदेव, आपको मैं प्रणाम करता हूँ, आप ही
ने पहले मेरा नरकों से उद्धार कर स्वर्ग के साथ सम्बन्ध करवाया था