Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 42
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
निषिद्ध आचरणरूपी खेत
में उत्पन्न हुए, नरकरूपी बड़ी-बड़ी शाखाओं को धारण करनेवाले और यातनारूपी पुष्प-समूह से
युक्त पापरूपी वृक्ष को मेरा नमस्कार हो