Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 43
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हिन्दी अर्थ
जिसके साथ मैंने दीर्घकाल तक प्रकृत योनियों का
उपभोग किया था, आज तक प्रत्यक्ष नहीं हुए उस मोहस्वरूप को मैं प्रणाम करता हूँ