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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 44

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

शब्द कर रहे बाँस जिसके मधुर शब्द हैं और शीर्ण पत्ते ही जिसके पहनने के लिए वस्त्र हैं, समाधि में प्रेयसी स्त्री के सदुश व्यवहार करनेवाली उस गुहारूपी तपस्विनी को मैं प्रणाम करता हूँ