Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
प्राप्य संसृतिसीमान्तं दुःखाब्धेः पारमागतः ।
वीतहव्यः शशामैवमपुनर्मनने मुनिः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राप्त कर अपने हृदय में ब्रह्म का लाभ किया