Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 17
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हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर ये मुनि समस्त पदार्थों में अवस्थित, समस्त भावों से वर्जित,
निरतिशय समता से पूर्ण प्रकाशमान परम पवित्र पदस्वरूप हो गये