Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अधिगतपरमार्थः क्षीणरागादिदोषः सकलमलविकारोपाधिसङ्गाद्यपेतः ।
चिरमनुसृतमन्तः स्वं स्वभावं विवेकी पदममलमनन्तं प्राप्तवान्शान्तशोकः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
वे चेत्य का अभाव होने से अचिन्मय ओर स्वतः चित्स्वरूप थे । तदनन्तर “नेति नेति"
इत्यादि श्रुतियों से बोधित जो अद्वैत तत्त्व है ओर जो वाणी का भी अगोचर है, उस तत्त्व को ये मुनि
प्राप्ति हो गये