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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 19

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

कपिलमुनि-निर्मित सांख्यशास्त्र मे प्रतिपादित पुरुषरूप, पतंजलि निर्मित योगशास्त्र में प्रतिपादित क्लेश आदि से वर्जित पुरुष विशेषात्मक ईश्वररूप, चन्द्रचिहवाले महादेवजी के अनुयायी पाशुपत मत में प्रदर्शित शिवरूप और काल ही एक तत्त्व है - इस प्रकार प्रतिपादन करनेवाले कालवादियों के मतम प्रदर्शित कालरूप जो तत्त्व हे, तत्स्वरूप होकर ये महामुनि वीतहव्य अवस्थित थे