Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
भूतेष्वेव प्रतिष्ठानि भूतानि सकलान्यलम् ।
मांसास्थियन्त्रदेहस्तु वनावनितलेऽवसत् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
भ्रमण से
रोकने पर कुम्हार के घर में चक्र जिस प्रकार अक्षुब्ध आकारवाला रहता है, वैसे ही ये मुनि अक्षुब्ध
आकारवाले थे ओर शान्त अत्यन्त निर्मल समुद्र की नाई परिपूर्ण थे