Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 9, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 9, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अद्य ये महतां मूर्ध्नि ते दिनैर्निपतन्त्यधः ।
हतचित्तमहत्तायां कैषा विश्वस्तता वत ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
आज जो बड़े लोगों के मस्तक पर विराजमान यानी महत्तम हैं, वे
कुछ ही दिनों में नीचे गिर जाते हैं, हे दुष्ट चित्त भला बतलाओ तो सही महत्ता में (राज्य आदि के वैभव
के उत्कर्ष में) मेरा क्या विश्वास हो ?