Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अयं सोहमयं नाहमिति चिन्ता नरोत्तमम् ।
खर्वीकरोति यं नान्तर्नष्टं तस्य मनो विदुः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
तुच्छ होने के कारण आकाशगमन आदि
सिद्धियाँ आत्मज्ञ विद्वान् की अभिलाषा की विषय नहीं हो सकती, क्योकि आत्मस्वरूप ज्ञानी स्वयं
आत्मा को प्राप्त कर चुका है इसलिए वह अपनी आत्मा में ही तृप्त रहता है, अतः अविद्यामय फलवाले
पदार्थो की ओर नहीं दौड़ता