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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

एष साधो मनोनाशो नष्टं चेह मनो भवेत् । चित्तनाशदशा चैषा जीवन्मुक्तस्य विद्यते ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

जो योगाभ्यास आदि सैकड़ों परिश्रमो से अविद्या को भी आकाशगमन आदि सिद्धियों के द्वारा सुखसाधन बना लेते हैं, वे आत्मतत्त्वज्ञ हैँ ही नहीं, क्योकि आकाशगमन आदि सिद्धियाँ अविद्यामय ही हैं