Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मनस्तां मूढतां विद्धि यदा नश्यति सानघ ।
चित्तनाशाभिधानं हि तदा सत्त्वमुदेत्यलम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तब क्या तत्त्वज्ञ पुरुषो मे आकाशगमन आदि सिद्धियो को सम्पादन करने की सामर्थ्य है ही नहीं ?
इस शंका पर (नही ऐसा उत्तर देते हैं।
तत्त्वज्ञ हो चाहे अतत्त्वज्ञ हो, जो कोई भी चिरकालिक प्रयत्नपूर्वक द्रव्य कर्मो से शास्त्रोक्त उपाय
का अनुष्ठान करता है, वह आकाशगमन आदि सिद्धियाँ प्राप्त कर सकता है