Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
आत्मज्ञानी को इच्छा क्यो नहीं होती 2 इसे कहते हैं।
हे निष्कलंक श्रीरामजी, जो आत्मा की प्राप्ति होती है, वह सब इच्छाओं की शान्ति होने पर ही
होती है, अतः आत्मज्ञ को आत्मलाभ की विरोधिनी इच्छा कैसे ओर किससे हो सकती है ?