Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
यदि आकाशमन आदि की किसी पुरूष को इच्छा
होती है, तो वह उसकी सिद्धि का साधन पूर्णरूप से करते हैं। आत्मज्ञानी पूर्णं है, अतः उसको कहीं
इच्छा नहीं होती