Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
इस विषय में पतंजलि मुनि ने हिसा प्रतिष्ठा का उपक्रम कर कहा है : (तत्संनिधौ वैरत्यागः”
(अहिंसा-सिद्ध होने पर योगी की संनिधि में हिंसक प्राणी वैर का त्याग कर देते हैं ।)
हिंसक प्राणी समदर्शी यति के संसर्ग से द्वेष आदि से मुक्त हो जाता हे, इसलिए वह किसी की भी
हिंसा करने में उस प्रकार प्रवृत्त नहीं होता, जिस प्रकार पथिक गाँव के समीपस्थ वन में उत्पन्न लता
आदि के छेदन मेँ प्रवृत्त नहीं होता