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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 50

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

योगी के शरीर के समीप से हिंसक प्राणी जब अन्यत्र चला जाता है, तो वहाँ जाकर द्वेष आदि से भरा जैसा जैसा जन्तु-समूह मिलता है, वैसा वैसा तदनुरूप वह हिंसक भाव को प्राप्त कर लेता है