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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

चित्तसत्तेह दुःखाय चित्तनाशः सुखाय तु । चित्तसत्तां क्षयं नीत्वा चित्तं नाशमुपानयेत् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे प्रिय श्रीरामजी, आत्मस्वरूप को जान लेने वाले बहुत से महात्मा इस लोक में विचरण कर रहे हैं, परन्तु उनमें से कोई भी आपकी नाई दुःख के अधीन नहीं होते