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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

तामसैर्वासनाजालैर्व्याप्तं यज्जन्मकारणम् । विद्यमानं मनो विद्धि तद्दुःखायैव केवलम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, आप अपने ही स्वरूप में स्थित हो जाइए, भीतर से सम्पूर्ण वस्तुओं का त्याग करनेवाले हो जाइए, सर्वत्र समबुद्धि हो जाइए ओर सुखी हो जाइए। आप सर्वत्र व्यापक है,आप आत्मस्वरूप ही है, आपका पुनः जन्म नहीं हैं