Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

प्राक्तनं गुणसंभारं ममेति बहु मन्यते । यत्तु चित्तमतत्त्वज्ञं दुःखितं जीव उच्यते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मयुरों के वश में सिंह नहीं हो जाते, वैसे ही आपके सदुश जीवन्मुक्त कोई भी महानुभाव हर्ष, अमर्ष आदि विकारों के वश में नहीं हो जाते