Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
विद्यमानं मनो यावत्तावद्दुःखक्षयः कुतः ।
मनस्यस्तं गते जन्तोः संसारोऽस्तमुपागतः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : भगवन्, इसी प्रसंग से मुझको यह एक संशय हुआ है, उसको आप मेच को
शरत्काल की नाई नष्ट कर दीजिए