Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
यदा प्रस्पन्दते प्राणो नाडीसंस्पर्शनोद्यतः ।
तदा संवेदनमयं चित्तमाशु प्रजायते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
लक्षण की उक्ति का उपसंहार करते हैं।
हे साधो, इस लोक में यही चित्त का विनाश है और इसीको नष्ट चित्त भी कहते हैं । यही जीवन्मुक्त
महानुभाव की चित्त नाश-दशा है