Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
प्राणस्पन्दनसुप्ता च तच्छान्तिं शान्तिरुच्यते ।
प्राणसंस्पन्दनात्संविद्याति वीटेव चोदिता ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पापशून्य रामजी, जीवन्मुक्त मन मत्री आदि शुभ गुणों
से सम्पन्न उत्तम वासनाओं से युक्त तथा पुनर्जन्म से शून्य होता है