Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
संवित्स्फुरति देहेषु प्राणस्पन्दप्रबोधिता ।
चक्रावर्तैरङ्गणेषु वीटेव करताडिता ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, ब्रह्माकार
वासना से ओतप्रोत, पुनर्जन्म से निर्मुक्त जो जीवन्मुक्त मन की सत्ता है, वह सत्त्वनाम से व्यवहृत
होती है