Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संवित्संरोधने श्रेयः परमं विद्धि राघव ।
कारणाक्रमणं यत्र क्षोभस्तत्र न विद्यते ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे सत्ता नाशस्य कीदशी“ इस प्रश्ना का समाधान हआ, यह समझना चाहिए । इसीलिए
मैत्री आदि गुणों की भी वहाँ प्रतिभासित रूप से उपपत्ति हो सकती है, यह कहते है ।
तदनन्तर जिस प्रकार चन्द्रमा में प्रसन्न ज्योत्सनाएँ रहती हे, वैसे ही जीवन्मुक्त मनोविनाश में
प्रसन्नता, मेत्री आदि गुण सदा सब तरह से रहते है