Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
ज्ञानवद्भिः प्रकटितामनुभूतां च राघव ।
चित्तस्योत्पत्तिमपरां वासनाजीवितां श्रृणु ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
न कोई वासना है, न किरी प्रकार की रचना है, न इच्छा
है, न अनिच्छा है, न राग है, न भाव है, अभाव है ओर न उक्त पद साध्य है