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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

दृढभावनया त्यक्तपूर्वापरविचारणम् । यदादानं पदार्थस्य वासना सा प्रकीर्तिता ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

वह परमपद तम ओर तेज से शून्य; तारे, चन्द्र, सूर्य ओर वायु से वर्जित; सन्ध्या, रजःकरण और सूर्यकान्ति से रहित शरत्कालीन स्वच्छ आकाश के सदुश अत्यन्त निर्मल है