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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

सर्वमेतत्समासेन पुनर्बोधविवृद्धये । सिद्धये ज्ञानसारस्य वद मे वदतांवर ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

प्राक्तन अनादि अध्यास से सिद्ध देह, इन्द्रिय, विषय आदि के धर्मोमिं आत्मा के संसगध्यास से ममता होती है ओर उससे "वे मेरे है" यों जीव घना अभिमान कर लेता हे । इसी एकमात्र अभिमान से जो आत्मतत्त्व को न पहचाननेवाला दुःखग्रस्त अज्ञानी चित्त है, वही जीव कहा जाता है