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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 91, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अन्तर्लीनघनारम्भशुभाशुभमहाङ्कुरम् । संसृतिव्रततेर्बीजं शरीरं विद्धि राघव ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जब तक मन का अस्तित्व है, तब तक दुःख का विनाश कैसे ? जब मन अस्त हो जाता है, तब प्राणी का संसार भी अस्त हो जाता है