Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 100
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 100 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 100
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
घटादिरूपों के विभाग से जो घटत्व, पटत्व,
त्वत्व, मत्व आदि उपाधिभूत सत्ता कही जाती है, वह नानाकृति सत्तास्वरूप है