Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 99
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 99 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 99
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
जो पहले श्लोक में “सन्मात्ररूप ब्रह्मबीज है' ऐसा कहा गया है, वहाँ पर घट, पट आदि में रहनेवाली
अर्थक्रियाकारित्वरूप व्यावहारिक सत्ता ही उसकी बीज है, ऐसा किसीको भ्रम न हो, इसलिए व्यावहारिक
सत्त्व से विलक्षण सत्व बतलाने के लिए पहले सत्ता की द्विविधता बतलाते है ।
श्रीरामजी, सत्ता के दो रूप स्थित हैं - एक तो अनेक आकारवाला होकर स्थित है ओर दूसरा
एकरूप होकर स्थित हे । अब उनका विभाग सुनिए