Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 102
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 102 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 102
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हिन्दी अर्थ
विशेषांश का परित्याग कर सन्मात्रस्वरूप जो लिप्त न करनेवाला सत्ता का एक रूप स्वरूप हे,
वही व्यापकरूप और वस्तुतत्त्व है, ऐसा विद्वान कहते हैं