Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 103
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 103 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 103
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हिन्दी अर्थ
व्यावहारिक सत्ता तो वास्तव नहीं है, ऐसा कहते हैं।
हे श्रीरामजी, सत्ता का रूप नाना आकार के रूप में कभी नहीं है, चूँकि तद्घटत्व आदिरूप
कपाल, चूर्ण, धूलि आदि अवस्थाओं में असंवेद्य होकर अनुवर्तमानता के रूप से दिखाई नहीं पड़ता है,
अतः वह सत्यरूप नहीं हो सकता