Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 104
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 104 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 104
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हिन्दी अर्थ
समस्त अवस्थाओं में अनुगत सद्रूप तो वैसा नहीं है, ऐसा कहते हैं।
सत्ता का जो विमलात्मा एकरूप स्वरूप है, वह कभी भी नाश प्राप्त नहीं करता और न कभी
विस्मृति प्राप्त करता है, अर्थात् सदा प्रकाशमान-रूप होने से वह नित्य चैतन्येकरसस्वरूप हैं