Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 105
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 105 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 105
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, यह कालसत्ता है और यह वस्तुसत्ता है, इस प्रकार की भी विभागकल्पना का परित्याग
कर आप एकमात्र सत्स्वरूप में ही आश्रित हो जाइए | तात्पर्य यह है कुछ लोग कहते हैं कि अतीत
ओर अनागत वस्तुओं में “अस्ति इस प्रकार का व्यवहार न होने के कारण वर्तमान काल ही सब
वस्तुओं की सत्ता है यानी सब पदार्थों की सत्ता वर्तमानकाल-सत्ता है। कुछ लोग कहते हैं कि समूह
बन कर अवयव ही अवयवी के रूप में स्फुरित होते हैँ अतः कला ही परमाणुरूप अवयव ही जगत्
की सत्ता है, ओर कुछ लोग यह कहते हैँ कि अवयवी पदार्थो मेँ भी अनुगत सत्ता जाति है, इसी
प्रकार अन्यान्य लोग भी अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार अन्यान्य सत्ताओं की कल्पना करते हैं, हे
श्रीरामजी इस तरह की तत्-तत् मत में कल्पित विभाग कल्पना का त्याग कर आप समन्मात्रस्वरूप
एकमात्र ब्रह्म का ही अवलम्बन कीजिए, इसी से आपके मनोरथो की सिद्धि हो जायेगी