Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 106
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 106 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 106
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हिन्दी अर्थ
हे
भद्र, जिस प्रकार अध्यस्त भेद का परित्याग करने पर अधिष्ठान सन्मात्र के परिशेष से समस्त जगत्
उत्तम सत्तास्वरूप है, वैसे ही अध्यस्त भेदकल्पना का परित्याग करने पर यद्यपि कालादि सत्ता भी
उत्तम सत्तास्वरूप ही हो जाती है, तथापि वह विभक्त रूप से बाधयोग्य होने के कारण पारमार्थिक
नहीं हे