Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 109
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 109 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 109
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हिन्दी अर्थ
हे विज्ञ जनों में श्रेष्ठ
श्रीरामजी, सामान्य सत्तामात्र की परम अवधिभूत जो सत्ता है, वही इस जगत् की ओर प्रतिबिम्ब
चित् की बीजरूप हुई है ओर उसी से यह समस्त जगत् प्रवृत्त हुआ हे