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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 110

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 110 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 110

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामभद्र, समस्त सत्ताओं की चरम अवधि मेँ जो कल्पनाओं से निर्मुक्त पद है, वही पद आदि (उत्पत्ति) ओर विनाश से शून्य हैं, उसका कोई बीज है नहीं