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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 119

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 119 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 119

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे प्रिय श्रीरामजी, वह सूर्य आदि तेजों का भी तेज, अन्धकारों का भी अन्धकार, वस्तुओं का भी वस्तु और दिशाओं का भी पर दिशारूप है