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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 120

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 120 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 120

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

वह ब्रह्मात्मक पद लोक में प्रसिद्ध कोई वस्तुरूप नहीं है ओर स्वल्प से भी स्वल्पतर प्रसिद्ध वस्तुरूप भी है, वह सत्ताश्रय (भावात्मक) और असत्ताश्रय (अभावात्मक) भी है, वह दृश्यरूप और अदृश्यरूप भी है, वह अहंरूप और अहंरूप नहीं भी है