Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
गच्छन्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रंस्तिष्ठञ्जाग्रत्स्वपंस्तथा ।
श्रेयसे परमायास्य त्रयस्याभ्यासवान्भव ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इसलिए जिस प्रकार मूढ पुरुष प्राण-परिस्पन्दा से तथा रागातिशय
के द्वारा वासनाओं के उत्पादनं से संवित् को विस्तृतत्वप्रयुक्त मनस्त्व की संपत्ति से युक्त करते हैं,
उस प्रकार यदि आप संवित् को विस्तृत नहीं करते हैँ, तो जन्म आदि समस्त विकारों से शून्य होकर
मुक्त ही हो जायेंगे