Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
वासनासंपरित्यागसमं प्राणनिरोधनम् ।
विदुस्तत्त्वविदस्तस्मात्तदाप्येवं समाहरेत् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, संवित् की स्थूलता को (मोटेपन को) आप चित्त जानिये, संवित्
के स्थूलतारूपी उसी चित्त ने इस अनर्थ जाल का विस्तार किया है, जिसने कि मनुष्य जीवों को
खण्डित ओर जर्जर कर डाला है