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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

प्राणायामचिराभ्यासैर्युक्त्या च गुरुदत्तया । आसनाशनयोगेन प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

फल की एकता के रूप से प्राण के संरोधन की ही प्रशंसा करते है। हे श्रीरामजी, बड़े बड़े विद्वान लोग प्राण-निरोध को ही चित्त-शान्ति रूप फल का दाता, उत्तम समता का हेतु, छः प्रकार के ऐश्वर्यों से युक्त तथा संवित्‌ की स्वस्थता कहते हैं