Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यथाभूतार्थदर्शित्वाद्वासना न प्रवर्तते ।
आदावन्ते च वस्तूनामविसंवादि यत्स्थितम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त के अन्य बीज का वर्णन करने के लिए प्रतिज्ञा करते हैं।
हे राघव, ज्ञानी पुरुषों केद्वारा भली प्रकार उपदिष्ट तथा स्वयं अनुभूत वासनाओं से जीवन पर्यन्त
उज्जीवित इस चित्त की दूसरे प्रकार से उत्पत्ति सुनिए