Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 37

संस्कृत श्लोक

याभिस्तज्जीयते क्षिप्रं धाराभिरिव भूरजः । सतीषु युक्तिष्वेतासु हठान्नियमयन्ति ये ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, निरन्तर वासना का अभाव होने से जब मन मनन नहीं करता, तब अमनस्ता का उदय होता हे, जो निरतिशय मोक्षस्वरूप शान्ति प्रदान करती है